“मै तुम्हें एक जंतर देता हूँ
।
जब भी तुम्हें संदेह हो या तुम्हारा
अहं तुम पर हावी होने लगे ,
तो यह कसौटी अपनाओ ;
जो सबसे गरीब और कमजोर आदमी तुमने
देखा हो ,
उसकी शक्ल याद करो
और अपने दिल से पूछो कि जो कदम
उठाने का तुम विचार कर रहे हो ,
वह उस आदमी के लिए कितना उपयोगी
होगा ।
क्या उससे उसे कुछ लाभ पहुंचेगा ?
क्या उससे वह अपने जीवन और भाग्य
पर कुछ काबू रख सकेगा ?
यानि क्या उससे उन करोड़ों लोगों
को स्वराज मिल सकेगा
जिनके पेट भूखे हैं और आत्मा अतृप्त
है?
तब तुम देखोगे कि तुम्हारा संदेह
मिट रहा है और अहं समाप्त हो रहा है। “
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